बुध कुँवार १२ , १२ आश्विन २०७९, बुधबार| थारु संम्बत:२६४५

मच्छी मर्ना साधन ओ विधि

मच्छी मर्ना साधन ओ विधि

मच्छी मर्ना साधन ओ विधि

हमार थारु समुदायमे मच्छी मर्ना साधन टमान बा । आवस्यकता अन्सार हम्रे टमान साधन ओ सामाग्री बेल्सटि आइल बटि । यहाँ मच्छी मर्ना साधन ओ विधिके बारेम चर्चा कैल बा ।

डिलिया
डिलिया मच्छी मारेबेर मच्छी ढर्ना काममे प्रयोग कैजाइठ् । यी फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । डिलिया बाँसले बनाइल रहठ् । बिचके भाग खोंखर रहठ । डिलिया खेझरी बिन्नक् लाग फेन मजा रहठ् । डिलिया सुखाइल सिढरा ओ पक्ठी ढारक् लाग बहुट उपयुक्त रहठ् । एमने सिढरा ओ पक्ठी ढरलेसे नैबिगरठ् ।

हेल्का
हेल्का मोटा धागाले बिनल रहठ । हेल्का गुलियार ओ खोंग्च्यार आकारके रहठ । हेल्काके डारा कठुवक् बनाइल रठैं । हेल्का खास कैके महिला लोग ढेरसे प्रयोग करठैं । हेल्का थारु समुदायमे मच्छी मारक् लाग प्रयोग कैजाइठ । हेल्का थारु समुदायके संस्कृति ओ पहिचान बचैना काम फेन हुइल बा ।

टापी
टापी मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । टापी पाटिर धागाले बनाइल रहट । टापी चार कोन्ना आकारके रहठ । टापीके टाँरा बाँसके बनाइल रहठ । टाँरा डु ठो चाहठ् । टापी महिला लोग प्रयोग करठैं । टापी बर्खा समय असार, सावन, भादो महिनामे झरीमे मच्छी मर्ना काममे प्रयोग कैजाइठ् । सिजन अन्सार फेन जब फेन प्रयोग करे सेक्जाइठ् ।

जाल
यी जाल फेन मच्छी मर्ना साधनमे एक हो । जाल मोटा धागाले बनाइल रहठ । जालके किनार किनारमे टरेओर लोहक् गोटी डारल रहठ् । जाल थारु समुदाय लगायत गैर थारु समुदायमे फेन प्रयोग करठैं । जाल पुरुष मनै प्रयोग करठैं । लडिया, टलुवा ओ पोखरीमे मच्छी मारक् लाग उपयुक्त मानजाइठ् ।

पखाइ
यी साधन फेन मच्छी मर्ना मध्य एक हो । पखाइ पाटिर धागाले बनाइल रहठ । पखाइके टाँरा बाँसके बनाइल रहठ । यी लम्मा, झोंगठ ओ तीन कोन्ना आकारके रहठ् । यी पखाइ महिला ओ पुरुष जे फेन प्रयोग करठैं ।

ढरहिया
ढरहिया फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । ढरहिया बरेरुवा, गहरा बनाके लगैठैं । ढरहिया बाँसके बनाइल रहठ् । यी चापर ओ एक मिटर ढेंग आकारके रहठ । एकार बिचमे खाेंखर रहठ । ढरहिया पुरुष मनै लगैठैं । ढरहिया थारु समुदायमे प्रयोग करठैंं । एमने जैसिन मच्छी फेन बाझे सेक्ठैं ।

खोंघिया
यी फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । यी लम्मा पाटिर आकारके रहठ । बिचमे खोंखर रहठ् । खोंघिया एक बाँहा लम्मा रहठ । यी खोंघिया बाँसके बनाइल रहठ । टमान बरेरुवा गहरामे मच्छी बझैना कामके लाग प्रयोग कैजाइठ ।

चेंउढी
चेंउढी पाटिर धागासे बनाइल मच्छी बझैना साधन मध्य एक हो । यी २० मिटरसे लेके ३० मिटरसम रहट । चेंउढी भारी भारी लडियामे लगैठैं । छोट बरा सब मेरके मच्छी चेंउढीमे बाझे सेक्ठैं ।

बरेरुवा
यी मच्छी बझैना उपाय मध्य एक हो । झरनहियाँ, कुलुवामे बरेरुवा टेक्के मच्छी बझैठैं । असार सावन भादो महिनामे बरेरुवामे मच्छी बझाइ सेक्जाइठ् ।

घाघी
घाघी फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । यी पाटिर धागासे बनाइल रहठ् । एकर किनारे किनारेमे बाँसके डाँरा लगाइल रहठ । यी तीन कोन्ना आकारके रहठ । यी टापी जस्टे रहठ । टर टापीसे झोंगिट रहठ । लडियामे कुँरहामे मच्छी मारक् लाग मजा रहठ घाघी ।

टट्री
टट्री मच्छी सुखैना काममे प्रयोग कैजाइठ् । यी फेन उ साधन मध्य एक हो । टट्री बाँससे बनाइल रहठ । यी चार कोन्ना आकारके रहठ । टट्रीमे सिकार मच्छी फेन सुख्वाइ सेक्जाइठ् ।

लुकाइ मर्ना (जोंजा)
रातके समयमे मच्छी मारक् लाग सन्ठीक् जोंजा बनाके लडियामे मच्छी मारे सेक्जाइट । ओहे प्रक्रियाहे मच्छी मर्ना लुकाइ कहिजाइठ ।

करेन्ट कगाके
करेन्ट लगाके फेन मच्छी मारे सेक्जाइठ । यी फेन मच्छी मर्ना उपाय मध्य एक हो । पानीमे करेन्ट लगाके मच्छी मारे सेक्जाइठ् । मने इ विधी खट्रा रहठ् ।

बन्सी
बन्सी फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । यी छोट छोट बहा आकारक लोहाके रहट । यी पलास्टिक डोरी लठ्ठीमे बहानके केच्ना गुडके फेन मच्छी बझाइ सेकजाइठ् । लडिना, झर्नैया ओ कुलुवामे बन्सी डृबाके मच्छी मारे सेक्जाइठ ।

बन्सा
यी फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । यी छोटछोट आकारके लोहक् रहठ । बन्सामे भारी भारी मच्छी बझाइ सेक्जाइठ । यी फेन बन्सी जस्टे पलास्टिकके डाेिरया लठ्ठीमे बान्ढके केच्ना गृुठ्के मच्छी बझाइ सेक्जाइठ । लडिना, झरनहिया ओ कुलुवामे बन्सा डृबाके मच्छी बझाइ सेक्जाइठ ।

भुर्का
यी फेन मच्छी मर्ना साधन मध्य एक हो । यी टठियामे पिठा ओ भुसी डारके लुग्गा बाँन्ढके छोटमोट डोंडर पारके लडिया, झरनहिया ओ कुलुवामे डुबाके मच्छी बझाइ सेक्जाइठ ।

ओहोडके/गेंरा लगाके/झुल लगाके
यी फेन मच्छी मर्ना एकठो उपाय हो । बरेरुवा बनाके हेल्का ओ झुल लगाके पानी ओहोडके फेन मच्छी मारे सेक्जाइठ । खटहामे गेंरा लगाके फेन मच्छी मारे सेक्जाइठ् ।

पम्पसेट लगाके
पम्पसेट लगाके कुलुवम्,लडियम्, खटहा ओ झरनहियामे पानी सुख्खाके फेन मच्छी मारे सेक्जाइठ । अइसिके फेन हमार थारु समुदायमे मच्छी मर्ना चलन बा ।
रविता चौधरी


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