बुध कुँवार १२ , १२ आश्विन २०७९, बुधबार| थारु संम्बत:२६४५

अस्टिम्की टिहुवारके महत्व

अस्टिम्की टिहुवारके महत्व

अस्टिम्की कलक कन्हैंयाँके जन्म टिहुवार उत्सव मनैना हो । अस्टिम्की गित संसार सिरजलसे लेके महाभरतके कथा पाजाइठ् । अस्टिम्की टिहुवार ठाउँ अनुसार फरक फरक तरिकासे मनापाजाइठ् । थारु जातिनमे एक रोचक तरिकासे मनापाजाइठ् । अस्टिम्की तयारी बहुट पहिलेसे करल ओ अस्टिम्कीमे चहना समान आघेसे जुटाजाइठ् । अस्टिम्की कसिक मनैना कना सरसल्लाह गाउँक् भलमन्सा, बरघर महटावाँके घर जम्मा होके छलफल करजाइठ् । यिहे अस्टिम्कीके तयारी पहिले पुर्खा ओइने कइसिक करि कना बात मै पुनर्वास २ अमरहिया कंचनपुरके भरतलाल भगोरिया कुसुम्या करल बातचित इ लेखमे लिखटुँ ।

अस्टिम्कीक सक्कु सामान जुटाके भिनसरिया खाइक लाग सिकार मच्छिक तयारी करजाए । ओस्टक घोंघी, गेक्टा मारके नानिंट । भिनसरिया कब खाजाइठ कलेसे भिनसरिया मुर्घी बोल्नासे पहिले खाइ पर्ना रहठ् । मुर्घी बोल्नासे पाछे खैलेसे डुठेरु मानजाइठ । अस्टिम्की लिखकलाग जन्नाहा लिख्ना सिपार मनैंनहे गोचारके भिनसरिया खवाजाइठ् ।

अस्टिम्की लिख्ना तयारी सबसे पहिले भिटाहे उज्जर कराइक लाग ढौरा माटीसे पिरोर जाइठ । ढौरा माटी नैरलेसे चाउरके पिठा घिँघाँेरके फेन पिरोर जाए । घरेम रंग नैरलेसे बजारसे चुन किनके फेन पिरोरके काम चलाइठ । मने चुन रंग काटडेहठ मजा नैरहठ् । ढौरा माटी कलक उज्जर माटी हो जोन परवटुवामे मिलठ् । हमार यहाँ तराइमे ओसिन माटी नैरलक ओरसे पहारसे नाने परठ ।

पहिले अस्टिम्की लिख्ना रंग घरहीं बनाजाए जस्टेके लाल रंगके गेर (गेरु) के बनाजाए । काइल रंग टोरैंयक् पट्टा खुचके ओकर रसके बनाजाए । करिया बनैना बा कलेसे सुखाइल लौंका जराके बनाजाए । लिख्ना चिज बाँसक् छन्टीमे रुवा लपेटके सक्कु रंगके लाग बनाजाए ।

सबसे पहिले गिन्नोरे मनैंयक् आकार मे घेरा बनाजाइठ् । जिहिहे पृथ्वी मानजाइठ । उहिहे बुट्टाडारके रंगाजाइठ् । टबजाके उहिहे तीन भाग करजाइठ् । सबसे उप्परके कोठामे पाँच पान्डव ओइनके फोटु बनाजाइठ । ओइनके डाहिन पाँजर जोन्हियाँके फोटु ओ वाँउ पाँजर दिनक फोटु रहठ । डोसर कोठामे द्रोपती ओइनके फोटु रहठ । ओइनहे नचुइया मँडरिया ओ सोगिया रठैं । अस्टेके सबसे टरका कोठाम पृथ्वीम रहल जिव जन्टुनके फोटु रठिन् । पुर्खनसे चल्टि आइल अस्टिम्की लिख्ना तरिका कसिन रहिन कना बात फेन यहाँ जानकार कराइ चाहटुँ ।

पुर्खनसे चल्टी आइल पहिलक मनैनके फोटु डोखठहुवा मेरिक बनाजाए । डोखठहुवा कहेबेर टिरछेक दुइठो रेखा कैचिक आकारमे टानके ओइनके हाँठ, गोरा, कपार बनाजाइठ् । संसारमे दिन ओ जोन्हियाँ बा कना चिन्हाँ हो । पाँच पान्डो ओ द्रोपती ओइनके फोटु बनैना कलक महाभारतके कथामे जोरल बहट लम्मा कथा बा । सबसे टरक कोठम् मेरमेराइक जिवजन्तु ओइनके फोटु बनाइल रहठ ।

टरक कोठामे हाँठी, गोरा, उँटवा, रौना, बसहरबर्ढा, बघुवा, डोली कजरिक बनुवाँ, लाउ मनै बठल, पुरैनिक पट्टा, मच्छि, गेकटा, केचना, गोहुवा, खेचही, कजरिक रुखवा । जोन रुखुवक उप्पर कन्हैया बठैल रठैं ।

हाँठी, घोरा, उँटवा बनैनाके कारण जब कन्हैयाँके जलम लेना समय आजैठिन उहेबेला सोरहिन्याँहे बैठके नानक लाग माँगल ओरसे बनागैल हो । अन्तमे डोलिम बैठक अइना मन करठ टब डोली बनाजाइठ् । डुढि केचना । जल, ठल ढर्टि सिरजैना उहे केचना, ओ गेकटा रलक ओरसे यिनहे बनागैल हो । गोहुवा मच्छी, खेचही सब पानी रलक बनागैल हो ।

लाउमे बैठल मनैं गोलिन हुइँट् । ओहे मनै कन्हंैयक् मनरख्नी हुइँट् । यिहे वेला कन्हैंया ओइनसे बाट करिंट । टबेमारे यी लाउ ओ मनंै बनाइल हो । कजरिक बनुवाँ जब जल, ठल, ढर्टि सिरजल टे कजरिक बनुवाँ फेन सिरजल कहिके बनाइल हो । बघुवा, बसहर बर्ढा जुटाके हर जोटे कहिके डेखगैल हो ।

रौनाके कथा महाभरतमे बा बहुट लम्मा कहानी बा । रौनाके बाराचो कपार कट्लेसे किल मुना बरदान भेटैलक ओरसे ओकर बारा कपार बनाइल हो । हलपट नैमुवम कना घमन्ड रठिस टबे ओरसे उहिहे नैटिक्ठैं । अस्टिम्की टिक्ना समयमे मकैंक बोंट, कुसक बोंट, खिरा, अमरुट फेन चहरैना चलन बा ।

मकैंक बोंट अनाज भरिम् सबसे पहिल हो । टबमारे मकैहे अस्टिम्कीमे चर्हाजाइठ् । कुस ढर्टिमे पहिले सिरजलक् ओरसे चर्हाजाइठ । खिरा, अमरुट पहिले फल हुइल ओरसे चर्हाजाइठ । जबसम अस्टिम्कीमे नैचर्हाइठ सम लावा फल नैखाइ मिलठ् ।

अस्टिम्किी टिकल रात भर गिट गाके जागजाइठ । विहानके पुजल चिज पानिम असराइ बेला अपन डुख बेमार, रोग सक्कु उहे संग पुहुके चलजा कहजाइठ् । अस्राके आके अपन घरमे बनाइल खँरिया, फुलौरी, हलुवा, सिकार, मच्छी, गेडागुडी, सागपात सब चिजहे अग्नी माताहे चर्हाके खानपिन सुरु हुइठ । कार्हल चिज अपन चेलिबेटिन घर अग्रासनके रुपमे डेजाइठ् ।

अग्रासन डेहे अउइया पहुनन्हे घरेम रहल टिना टावन ओ घरेम रहल मुर्घी मारके ओ पिना चिज जाँर झोरडारु संग स्वागत करजाइठ । भगत (साकाहारी) आइनहे भात मिठमिठ खवाके स्वागत करजाइठ् । अस्तिम्की हमार थारुनके पहिचान ओ पुर्खनके रिट लावा पुस्टा ओइने डेखे पैंहि ओ रमाइ पैंहि । अस्टिम्की मनाइ ओ अपन संसकृति बचाइ ।


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