शुक कार्तिक ०५ , ५ कार्तिक २०७८, शुक्रबार| थारु संम्बत:२६४४

अट्वारीक अग्रासन

अट्वारीक अग्रासन

अट्वारीक अग्रासन

हमार थारू ओइनके महान चाड (एक एतिहासिक परिचय) बरस भरके अट्वारी टिहुवार हो । पहिले ओ आझकल सक्कु थारू हुक्र तराइके यी अट्वारी मनैटी आइटै । उ समयमे साउन, भादौहे कालारात्री कैके मानजाए । उ समयमे रोग ब्याढी, बढि़या जसिन टमान महामारी हुइन । यी समयहे भुतप्रेत और द्रहिट शक्तिके प्रकोपफे मानजाए । पहिले पहिले भारी वर्षा हुइन । भारी वर्षा हुइलेक कारण थारू समुदायके मनै बाहारफे नैजाइठ् । धान लगाके ओराइल पाछे गाउँमे हरेरी पुजा करठैं हरेरी पुजा ओराइल पाछे मजा दिनके सुरुवात हुइट कना मान्यता पहिलेकहमार आजीआजा ओइनके रहिन । हमार थारू समुदायके मनै अपन अपन चेलीबेटी ओइनके हालखबर पुछेक लाग पहुरा लैके जिना चलन रहिन । जौन चलन आझफे अग्रासनके रूपमे डेना करठैं । व्रत बैठ्ल डोसर दिन अपन चेलीबेटी ओइनहे अग्रासन डेहे जिना चलन बा ।

सूर्यके उपासनाके कर्ममे भदौ महिनमे कृष्ण जन्माष्टमीक पाछे शुक्लपक्षके पहिले अट्वारके दिन थारू पुरुष ओ महिलाहुकनसे दिनभर व्रत बैठ्ना करठैं । यी टिहुवार विशेष पुरुष हुकरे मनैलेक ओरसे अट्वारी पुरुष हुकनके माध्यमसे पवित्र तीरकाले रोटी पकाके दही, फलफुल जसिन परिकार अग्नि डेवटाहे अर्पण कैके अपन विवाहित दिदि, बहिनयन हुकनके लाग अग्रासन ढरके सक्कु परिकार खैटी मनैना पर्व हो अट्वारी । अट्वारी बल, शक्ति, न्याय ओ सहयोग ओ सद्भावके पर्व हो । यिहे अवसरमे आगी, पानी ओ भैयनके पुजा कैजाइठ् । भ्यावा प्रति समर्पण ओ दिदि, बहिन्या हुकनके माया स्वरुप यी पर्व बहुट मजÞासे रमैटी नचटी गैटी यीपर्व मनाजाइठ् ।

अट्वारीहे बर्का अट्वारीफे कैजाइठ् । अट्वारीमे विशेष कैके आगी ओ भ्यावाके पुजा कैजाइठ् । भ्यावा कलक खर्किमारके प्रमुख पात्र हो । खर्किमार हिन्दुशास्त्र महाभारतसे जुरले बा । बर्का अट्वार आदिवासी थारू ओइने मनैना एकठो महत्वपूर्ण सांस्कृतिक ओ धार्मिक परम्परा बोकल बा । यी पर्व अष्टिम्की (थारू महिला हुक्र व्रत बैठ्के भगवान श्री कृष्णके जन्मके अवसरमे पुजा कैजाइठ् यी दिन) अष्टिम्की हुइलेक डोसर अट्वार मनैना करठंै । यी पर्व खÞास कैके पुरुष ओइने मनैना ओ व्रत बैठ्ना करठैं । ओ आझकल महिला हुक्रेफे व्रत बैठ्के अट्वारी रना करल बटैं । यी पर्व अट्वारके दिन परलेक ओरसे ओ यी पर्वहे अट्वारी कैजाइठ् ।
अट्वारीक् अग्रास सक्कु दिदी, बहिन्यनके अस्रा रठिन । यी दिन अपन दिदी, बहिन्यान अपन दिदी, बाबुनके सम्झना स्वरुप पहुरा डेहे जिठै । दिदी बहिन्यनके फेन अपन दादु भैया हुकनके माया सम्झना यी दिन विशेष रठिन । आझकलके मनै यी पर्वहे गांउँ समुदायमे नाचगान करटी मनैना करठैं । आझकल मनै बहुट अलसी होगिल बटैं । व्रत बैठ्ना झाउ लग्ठिन । पहिलेक मनैनके हस विश्वास ओ आस्था आझके युवा हुकनमें नै हुटिन । पहिलेक हस बल, शक्ति जसिन कुछ नैहुइन आझके मनैनमे ।
शान्ती चौधरी


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