बुध कुँवार १२ , १२ आश्विन २०७९, बुधबार| थारु संम्बत:२६४५

घुसखोरी

घुसखोरी


अझकल इ संसार बुहुट बडल गैल बा । एहोर हेरो घुसखोरी उहोर हेरो घुसखोरी । आझ कोन ठाउँमे घुसखोरी नैहो । आझ बिना घुसखोरीके कामे नैहो । असिन डेख्ठँु टे महिन मजा नैलागठ । कसिन बनगिल बा हमार डेस आझ इमान्डमरीके कौनो महत्व नैरहिगिल् । घुसखोरीके कारन आझ मनैं मेहेनट कलक का हो बिसरगिल बटैं । सब जहन पटा बटिन कि घुस लेके डुनियाँ ।


एक डिन अस्पटालमे गलै रहुँ । कठैं सरकारी अस्पटालमे रुपँया नै लागठ । मने उ डिन मै असिन डेख्नु कि एकठो गरिब मनयाँ अपन छाइहे लनले रहे । उ डक्टरुवाहे कहटा मोर छाइहे हेरडेउ । डक्टरुवा बिना रसिडके मैं नैहेरम कैडेहल । का मनैंनके जिबन कट्रा अमूल्य बा । मनैं डक्टरवाहे भगवानके रुपमे मन्ठैं । मनैं कठैं हमरे भगवानहे हमरे नैडेख्ले हुइटि । मने डक्टरवा जो हमार लाग भगवान हुइटैं । मनैं अट्रा बिश्वास करके अस्पटाल जैठैं । मने आझ मनैंनके विश्वासके संग काहे असिक खेल्टंै । बिना रुपँयाके कोनो काम नैहुइँट । काहे असिन होगैल संसार काहे मनंैन मनैंक जीवन अट्रा सस्टा लागटिन् । आझ सरकारी कार्यालयसे लेके जट्राफे कार्यालय बा सक्कु कार्यालयमे घुसखोरी हुइटा । सरकार हेरटा, डेख्टा मने फे काहे नैरोक्ठो । कसिक रोकि सरकार अपनेहे बड्ले नैसेकल हो टे ।


सबसे पहिले टे सरकार बडल ना चाहि । टब जाके डेस बड्ले सेकि । असिक डेसमे घुसखोरी पलि रहिटे सब जहनके मनसे इमान्डारी कना शब्द हेरा जैहिन । आझ घुसखोरीके कारन जे मेहेनट करटा उ पास नैहुइठो । मने जे रुपिया डेखाइटा उ पास हुइटा । समाजमे आझके युवा बिगरना कारन का हो । कि जे मजा युवा बटंै ओइनके मे रहल मजा पन नैडेख्नै । ओइनके प्रतिभाहे कौनो कडर नैकरडेठैं । ओइनके जोन मेहेनट करल नैडेख्डेठिन टे ओइने उ काम छोरडेठैं । ओइनके ठन कोनो काम नै रठिन टे ओइने बिना कामके एहोर ओहोर घुमे लग्ठंै । अन्टिममे जाके हँुकरे गाँजा, भांग, डारु जसिन नैहुइना चिज खाइ लगठैं । हमार डेसमे बहुट अपराध हुइना कारन मन्से घुसखोरी फे एकठो हो । हमार डेसमे यडि घुसखोरी नियन्त्रन हुइ टे अपराधफे कम हुइ । डेसमे शान्ति लन्ना बा कलेसे घुसखोरीके नियन्त्रन जसिकफे हुइपर्ना हो । घुसखोरी कोन क्षेत्रमे नैहो । घुसखारीके कारन साधारण जनता हुँकन मेर मेरके समस्या भोगे परटिन । कारन घुसखोरी केउ अपन मनैंन बिरुवा नैकराइ सेकट टे केउ अपन मेहेनत अनुसार काम नै पाइट् । अस्टेक बहुट समस्या भोगे परटिन आम नागरिक हुँकन् ।

मनै काहे आत्महत्या करठैं केउ कठैं अपन घरायसी समस्या रहिन टे मर गैलैं । ओकर दुःखहे केउ नैबुझलै एकठो टे महिन इ समाजके मनैंनके सोँच डेख्ठुँ टे मन डुखट । काहे मुवल ठोस बात बिना जन्ले का का बात फैला डेठै एकठो । यडि मनैयाँ अपन घरके कारनसे मुवल टे बिना कारन टे नैमुवल हुइ । अपन घरके मनैंनके इच्छा पुरा नैकरे सेकल काहे कि उ जोन ठाउँ कामके लाग जाइ टे सब जे रुपिया डेबे टब किल काम मिलि कहंै । टे उ कट्रासम सहे सेकि । असिन संसार जहाँ बिना घुसके काम नै बन्ना के जिए सेकि । असिन बातके अन्त्य जसिकफे करेपर्ना हो ।


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