सोम्मार जेठ ०९ , ९ जेष्ठ २०७९, सोमबार| थारु संम्बत:२६४५

थारु लोकगीतके महत्व

थारु लोकगीतके महत्व

थारु समुदायके लोकगीत समय अनुसार फरक–फरक बा । थारु समाजके पुर्खाके काहाइ अनुसार यी थारु जातिनके विशेषता हो । समय अनुसार थारु हुँकरे मुहमे सजना, सजिनी, कामकाजमे, टरटिहुवारमे, भोज, वनपातमे, नाच नाचेबेर, खेतीपातीमे काम करेबेर ओ प्रकृतिके समय अनुसार गीत गैठैं । प्रकृतिके पुजारि हँुकरे समाजके गीतबाँसमे समाजके नेतृत्व फेन कइजाइठ । समाजहे कौनो फेन टौरतरिकामे परिचय डेहना काम लोकगीतसे फेन हुइठ । थारु समुदायके लोकगीत टमान प्रकारके बा ।

गुरुबाबाके जन्मौटी गीत–भदौसे लेके जेठ महिनासम्
हाँहाँरे चौध महिना गुरुबाबा नाही ओ सरपुन चौध महिना बा ए गुरुबाबा हठिया जलम रहाइ ।
हाँहाँ रे पन्ध्र महिना गरुबाबा लिहल औटार, कोंहराइ बनवा ए गुरुबाबा लिहल औटार ।

बडर्किमार गीत–दशैसे लेके कात्तिक महिनासम्
हाइरे कि बाजन बाज डुवार, हाइरे कि बाजन बाज देव डुवार ।
बाजन बाज हरि कविलाश, बाजन बाज रह परिधान ।
भली ओ भीम अर्जन, धन्न कौरोमारी बहुर गाइ ।
हाँ जौ धन होइ जौ परिवाना, गाँठी बाँधलजाइ सैडान जौ जीउ जीबुँ गैया गत हो,
मलुक ओरसे कोइ धान खाभली ओ भीम अर्जुन धन्न कौरोमारीबहुर गाइ ।

सखिया दशारा गीत–भदौ महिनासे कात्तिकसम्
बसुलि बजाइ कन्हैया सब बाट सुनाइल री ।
सखी रे बसुलिसे सब बाट पुगलरी हरी कबिलाश ।
दुइ रङ्ग धुनसे बसुलि ना बजाव री ।
सखी रे हरिक बिलाशक डेंउटा सब बाट ओना ।

गोरिया दशारा गीत–भदौ महिनासे कात्तिकसम्
लै जावो री लै जावो गोरिनिक पुटा री ।
गोरी ओ आनक धनिया चोरी री लैजा ।
सावर राम री देव नुकट छपकट गैलरी ।
गोरी ओ पाछु परल बाट झमरी देव हो ।
लै जावो लै री जावो चोरनिक पुटारी गोरी ओ
तोरी घ्याचा कटैबुँ री सुरुखेत ।

भोजाह गीत–कुवाँर महिनासे असारसम्, पुस ओ चैत महिना बाहेक
सखवक पटिया लुहुर लुहुर भेंठी टुरे हरियार रे ।
आब कितौ आइबो पटोहिया नाहरे कुछउ ।
होवइ चोलिया टो डेहनु सेन्दुर लागल, मोटी गुडलहास् रे ।

डोवार छेकाइ मंगर
हमरु डुलारु भैया पटासिरी निकरै रे, सरजुल छेकनै डुवार ।
छोरो छोरो बहिनी हमरी डुवार, मठके टिकुलिया लैहो ।
ना मही लेबु रे मठके टिकुलिया रे, ना महि छोरबु डुवार ।
यहे टो बाटैं घारी भर भैसिनिया, ओकरे मंगना मोरे बा ।

ढुमरु गीत–माघ महिनासे चैतसम्
बन बोल रे बोले रे बाघुनी रे, कुजिला बन बोलट हैरे बसुली ।
दशहरा जोटै कोदारा चम्कानैँ, छरिछरि बोवैँ अँजना धना हो ।
बन बोल रे बोले रे बाघुनी रे, कुजिला बन बोलट हैरे बसुली ।
सबके टिरिया देखो घरसेही अँगान, हमरे टिरिया कहाँ गैनै होे ।
कौने मास फुल बसन्डर । फुले कौने मास आम मौडे रे ।
कौने मास बन फुलफुली गैल । टेंसु चम्फाचमेली कै फुलफुली ।
माठे मे रहे कुमिलाइ ।

माँगर गइना–जेठ महिनासे वैशाखुसम्
असावैका साल बाबा ।
रकम मंहगा भैला रकम भइला आनमोला रे ।
अरि असावैका साल बाबा ।
रहि बसी जैबु…रहि जैबु बाँरे कुवाँरे ।

सजना ओ सजनी–जेठ महिनासे सावनसम्
अरे पुरुवसे उमरल कारी री बदरिया रे… पछिवइ चली जावइ ।
अरी परी गैइने जेठ असारकाहि महिना ! पनिया नाही बरसाइ ।
अरी गैवरवका बिनल झलरी छटरीया रै उपरे पावोन डोलैं ।
अरी छिछि बुन्दा पनिया नै परल मोर चुन्दरी नै भिजवाइ ।
अस्टके थारु समुदायके गीत औरे फेन बहुट किसिमके बा ।


error: Content is protected !!