बुध कुँवार १२ , १२ आश्विन २०७९, बुधबार| थारु संम्बत:२६४५

हरडहुवा खैना चलन

हरडहुवा खैना चलन

हमार थारु जातिनमे धान लगाके सेक्के हरडहुवा खैना चलन बा । यी हरडहुवा फेन एकठो टिहुवार हो । जौन थारु जातिनमे परम्परागत रुपमे चलटी आइल बा । यी थारु समुदायमे घर घर हरडहुवा खैना चलन बा । यी टिहुवारके कौनो तिथि मिति नैहो । यी टिहुवार जब सक्कु समुदायके मनै धान लगाके सेक्ठैं टब यी टिहुवार मनैठैं । यि चलन पहिलेक पुर्खनके चलन रित हो । जोन अभिनफें चल्टी आइल बा । यि टिहुवारमे कौनो नाँचगान नैहुइठ । धान लगाके मिच्छाइल ओरसे हरडहुवा खैना करठैं । यि टिहुवारमे कौनो पाठपुजा नैफेरठैं । खाली अपन शरीरके सिहरा बिस्राइक लाग हरडहुवा खैठैं ।

हमार थारु जातिनमे बहुत मेरके टिहुवार बा । जौन हरडहुवा फेन परठ । विशेस कैके हरडहुवा थारु समुदायमे किल मनैठैं । थारु समुदायके मनै सक्कु जाने धान लगाके सेक्ठैं टे हरडहुवा खैठैं । यि पुर्खौसे चल्टी आइल रित हो । हरडहुवामे अपन नाटपाँट, अपन चेलीबेटीन, गैगोटियार ओ अपन परोसीनहे बलैठैं । यि टिहुवार बहुट रमाइलोसे करठैं । काहे कि यि टिहुवार धान लगाके सेक्टी किल मनैना करलक ओरसे असार कि टे सावनमे किल मनैठैं । ओस्टेक ओरे बाँकी टिहुवार भदौ महिनासे सुरु हुइजाइठ । यि टिहुवार कौनो तिथी मिति नै हुइलक ओरसे जब फेन मनाइ सेक्जाइठ । सक्कु नाटपाँट, गैगोटियार, परोसी एक आपसमे मिलके हरडहुवा खैठैं । बहुट चिजके खैना परिकार बनैना चलन बा । सक्कु गाँउके मनै मिलके सुरा मरठैं ।

यि टिहुवारमे सुरा मर्ना चलन फेन बा । हरडहुवा खेलबो टे धान बाली बहुट फरगर हुइट कना पहिलेक पुर्खनके कहाइ बा । धान लगैलक ओरौनी दिन हरडहुवा खैना चलन फेन सुरु हुइलक हो । पहिलेके पुर्खा हुँकरे कहाइ अनुसार अभिनफे यि चलन चल्टी बा । असारके महिनासे धान लगैना सुरु कैके सावन महिनासम लगैठैं । अझकल टे असारसे सुरु कैके असारमे सेक्के असार महिनामे हरडहुवा खा डरठैं । पहिलेक ओ अझकल ठोरचे फरक होगैल बा । हरडहुवा खैना चलन टे फरक नैहुइल हो । पहिले सावन महिनामे हरडहुवा खाँइट् । टे अझकल असारमे खैठैं । मौसम ओ समय अनुसार वातावरण फरक हुइलक ओरसे हरडहुवा असारमे खैठैं ।

अझकल असार महिनासे धान लगैना सुरु कैके असारमे हरडहुवा खैठैं । हरडहुवा मनैना चलन थारु समुदायमे डेख्जाइठ । हरडहुवा एकठो पुर्खनके चलाइल रित हो । जौन अभिन फेन चल्टी बा । हरडहुवाके कौनो तिथि मिति, दिन नैहुइल ओरसे जबफेन मनाइ सेक्जाइठ । हरडहुवा समाजके सल्लाह अनुसार एक दिन मनाजाइठ् । जब सक्कु थारु समुदायके किसान धान लगाके सेक्ठंै टे हरडहुवा खैना चलन बा । यि टिहुवारसे थारु समुदायके पहिचान फेन हुइल बा । काहे कि यि टिहुवार थारु समुदायमे किल मनैठैं । खाली पुर्खनके चलाइल रित हो ओ धान लगाके मिच्छाइल कारणसे फेन हरडहुवा खैठैं । यि टिहुवार कौनो संघ संस्था ओ सरकार कौनो मान्यता नैडेले हो ।

थारु हुँक्रे अपन खेतिवालीके लाग मनैटी आइल बटैं । यि टिहुवार समुदायके पहिचान बोकल बा । यि टिहुवारके कौनो लिखित डस्ताबेज नैहुइलक ओरसे तिथि मिति नै हो । थारुनके यि टिहुवार अपन मेरके पहिचान बोकल बा । लेकिन थारु समुदायफेन एक रुपता हुइ पर्ना बहुट जरुरी बा । मोर बिचारमे यि टिहुवारमे थारु संस्कृति झल्कना मेरके नाचगानफे हुइ पर्ना हो । यि टिहुवार सक्कु थारु समुदायके मनैन जागरुक होके आउर ढेरसे ढेर मजा बनाइ पर्ना हो । सक्कु थारु समुदायके मनै एकरुपता हुइ ओ थारु पहिचानके टिहुवार आघे बहराइ ।


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