बुध कुँवार १२ , १२ आश्विन २०७९, बुधबार| थारु संम्बत:२६४५

अस्टिम्की आइ लागल

अस्टिम्की आइ लागल

अस्टिम्की अइटि रहल भदौ महिनामे मनैना टिहुवार हो । कौनो साल सावनमे फेन परे सेकठ् । कृष्ण अस्टिम्की हमार पुर्खा हुकनके पालासे मनैटि आइल टिहुवार हो । कृष्ण अस्टिम्की थारु समुदायमे मनैना टमान टिहुवार मनसे कृष्ण अस्टिम्कीफेें एक हो । कृष्ण अस्टिम्की थारु समुदायमे खुसी ओ उमंगके सँग मनैटी आइल टिहुवार हो । यि टिहुवार भदौं महिनामे मनैना चलन बा । कृष्ण भगवानके जन्म भदौं महिनामे हुइलक ओरसे यि टिहुवार भदौं महिनामे मना जाइठ । यि टिहुवार अपन स्वास्थ्य, बैबाहिक सुखड ओ कन्याँ लैडिन, महिला हुक्र मजा अपन वरके लाग बर्ट बैठना चलन बा । असौं २०७८ सालके भदौं १४ गते परल बा ।

कृष्ण अस्टिम्कीमे बर्ट बैठना दिनसे आघेक रातके भिन्सरिया भात खैना चलन बा । भिन्सरिया खैना दिन सक्कु गाउँक् मनै मिलके लडियामे मच्छी मारे जैना चलन रहे । दिनके मच्छी मारके साँझके रातिक १२ बजे से पाछे डर खैना चलन बा । भिन्सरिया भात १२ से आघे खैलेसे छुट परठ । बर्ट रहल दिन सक्करहिं उठके पुइँक साग टुर्ना, डोना ओ टेपरी बनैना चलन बा । यी दिन थारु महिला हुकनके लाग विषेश दिन हुइटिन । भोज करल जन्नी हुकरे अपन ठरुवाके लम्मा आयुके लाग निरजल वर्ट बैठ्ठैं । बर्ट रहल दिन ‘टिके जाइबेर जन्नी मनै ७ चो भौका छोरठ’ कहाइ बा । ओसिक टे कोइ पुजा करठंै टे, कोइ गुरुवाके घर टिके जइना चलन बटिन । हमार पुर्खा हुकनके चलल् रिट अनुसार भित्तामे फोटु बनाके टिक्ना चलन बा । ओस्टेके पस्छिउँ ओर डिन ओ पुरुव ओर जोन्ह्याँ, पाँच पाण्डप, रौना, डोली, मच्छी, कजरीक बनुवाँ, लाउ, मनजरुवा, गोरु, हर, जवा, किल्वाही, बिछी, गेंगता, हठिया ओ लडिया ओ औरे फेन बहुत चित्र बनाइल रहठ । यी पर्खनके चलाइल चलन हो ।

अस्टिम्की थारु बाहेक ओरे समुदायके मनै फेन मनैठै । थारु ओ औरे समुदायके यी टिहुवार मनैना चलन फेन फरक फरक बा । कृष्णके जन्मके अवसरमे यी दिन रातभर गीत गैना चलन बा ।
पहिलेटे सिरीजल जल थल ढरटी ।
सिरी जिटे गैला हो कुशकइ डाभ ।।

हमार पुर्खा हुकनके पालासे यी चलन चलटिमे आइल बा । बहुट परिकार मिठमिठ खइना चिज तयार पारके अपन अपन दिदी बाबुनहे अग्रासन डेहे जइना चलन बा ।

हमार पुर्खनके चलाइल यी टिहुवारके अपन छुट्टे महत्व बटिस । यी टिहुवारके फेन अपन छृुट्टै महत्व बा । यी पर्व ‘घाम ओराइट जारके सुरुवाट हुइट’ कना हमार पुर्खनके कहाइ बटिन । अपन संस्कृति जोगैटी पहिचानफे यि टिहुवार प्रत्येक साल मनैटी आइल बटैं । संस्कृति कोनोफे समुदायके पहिचान हो । प्रत्येक समुदायके टिहुवार अनुसारफे फरक–फरक बा । समाजके संस्कृति बचाइक लाग थारुनके मनैना टिहुवार बिचार पुगैना हुइटिन । थारु समुदायके धर्म, संस्कृतिहे हम्रे बचाके नैढरबी टे हमार धर्म, संस्कृति ओ टिहुवार हेरैटि जाइ । टबे मारे यिहिन जोगाइक लाग सक्कुजे थारु डाडुभैया ओ दिदि बहिन्याँ हुक्र अपन–अपन ओहोसे जोगैटि अइना हो । थारु जाटिनके टमान टिहुवार बा जोन आझके युवा हुक्र बिसरटि जाइट । थारु समाजमे बैठना थारु जाति हुक्र नैअपन टिहुवार कैसिक मनैठैं कनाफे भुल गैल बटैं । कृष्ण अस्टिम्की जैसिन टमान टिहुवार हमार थारु जातिके मनैठै । मनैना टे मनैठै मने पहिलेक जस्टे नैमनैठैं अझकल । बहुट चलन बिसरा गैल बटैं आझुक युवा ओइने ।


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